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ब्लॉग्स (32)
बहुत दिन हो गए तुझसे मिले हुए .....सच में बहुत दिन हो गए ..........अब सुबह देर से उठता हु ......वो तेरा चेहरा ही है जो आके जगाता है मुझे .....तेरी उंगलियों के स्पर्श से ही पलके खोल पता हु अब भी मै.......बारिश भी होती है कभी कभी बस होठों पे आके बुँदे सुख ... आगे पढ़ें...

कई बार मै अपने कमरे की खिड़की से रात को गौर से देखता हु ......तो देख पाता हु इसकी कशिश भरी खामोशी को .......वो मेरी बालकॉनी मै लगा पौधा जो दिन भर मदमस्त नृत्य किया करता है ......वो अब चुप है बिलकुल चुप ....दूर पटरियों पे दौड़ते सफ़र की आवाज कानो मै सुनाई ... आगे पढ़ें...

अब जब भी शाम को अकसर चला जाता था छत के किनारे पे..........उस डूबते हुए रक्तमय वर्ण युक्त सूर्य को देखने............तब ना जाने क्यू उसके अस्त होते-होते ख़ुद को भी अस्त सा पता था........एक अजीब सी तन्हायी में सिमटता सा चला जाता था......ना जाने किस पल के ... आगे पढ़ें...