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ब्लॉग्स (44)
बहुत दिन हो गए तुझसे मिले हुए .....सच में बहुत दिन हो गए ..........अब सुबह देर से उठता हु ......वो तेरा चेहरा ही है जो आके जगाता है मुझे .....तेरी उंगलियों के स्पर्श से ही पलके खोल पता हु अब भी मै.......बारिश भी होती है कभी कभी बस होठों पे आके बुँदे सुख ... आगे पढ़ें...

कई बार मै अपने कमरे की खिड़की से रात को गौर से देखता हु ......तो देख पाता हु इसकी कशिश भरी खामोशी को .......वो मेरी बालकॉनी मै लगा पौधा जो दिन भर मदमस्त नृत्य किया करता है ......वो अब चुप है बिलकुल चुप ....दूर पटरियों पे दौड़ते सफ़र की आवाज कानो मै सुनाई ... आगे पढ़ें...

अब जब भी शाम को अकसर चला जाता था छत के किनारे पे..........उस डूबते हुए रक्तमय वर्ण युक्त सूर्य को देखने............तब ना जाने क्यू उसके अस्त होते-होते ख़ुद को भी अस्त सा पता था........एक अजीब सी तन्हायी में सिमटता सा चला जाता था......ना जाने किस पल के ... आगे पढ़ें...

कभी कभी चाँद को देखता हूँ तो तेरा अक्स नजर आता है..... उस अक्स से जी करता है बातें करने का...में यहा से शब्दों को पीरो पीरो के भेजता हु......पता नही पहुँच भी पाते होंगे वहा तक.....तब अचानाक से तू बादलो में छिप जाता है.....शायद शरमा जाता है......तब बस ... आगे पढ़ें...

मैं शब्दों से सरोबोर एक खत छोड़ आया था तेरी मेज पे........इस उम्मीद से की तेरी निगाहो से होके गुजरेंगे मेरे शब्द.....कुछ एक दो खामोश मुमकिन रात ही तो थी ,जब लिख पाया था इसे.....ये सिर्फ़ खत नही मेरी हर रात की खामोशी है.......जो खामोशी से कुछ कहना चाहती ... आगे पढ़ें...

में खामोश था हर रात की तरह इस रात भी.......बस तेरी तनहायी बातें करती है.....गुनगुनाती है....महकाती है.....कभी आँखों में आकें बिखर जाती है....कभी बाहों में भर लेती है.....तेरी ये तनहायी इस खामोश रात मे...... आगे पढ़ें...

कुछ वक्त यौहि बीता तेरी यादों मे........अब ये सोचता हु..........तु है भी तो सिर्फ़ यादों मे.........कहा गए वो नमकीन पानी के झरने जो बह जाया करते थे गालों पर......अब बारिश भी नही होती..........मुझे अब भी याद है दोपहर की वो धूप जब बदन जल जाया करता ... आगे पढ़ें...

इस खामोश रात में आप भी खामोश से लगे मुझे..........चाँद सितारे तो थे पर आप ना थे..........धीरे-धीर... आगे पढ़ें...

तु मेरे साथ है...हर सफर की तरह इस बार भी..........बस में बैठा हु.....खिड़की के पास.......घने कोहरे को चीरते हुए बिना रुके बिना थके मेरा ये सफर........दुर-दुर तक ओस की बुंदो से नम हुए खेतों को पीछे छोड़ता जा रहा हु......दुर कुछ घर धुंद मै दिखायी पड़ते ... आगे पढ़ें...

आज सुबह उठा तो सोचा एक ज़िंदगी जी जाये..........दिन भर चलता रहा एक तलाश के लिये...........शाम हुई फिर शाम को पीछे छोड़ आया मै..........अब रात है....मै हूँ.....ये मयखाना है......कुछ आवाजे है जो कानो में सुनायी देती है.......कुछ खमोशी है जो शायाद कुछ कह्ती ... आगे पढ़ें...

ये तेरी मेरी बात है..........खमोश एक रात है.........कुछ जज्बात है.........कुछ हालात है....कुछ कोशिश है......कुछ हार है......कुछ ख्वाब है.......कुछ हकीकत है....कुछ नजदीकिया है....कुछ फासले है.......कुछ तलाश है.......कुछ इंत्जार है.......कुछ प्यार है....कुछ ... आगे पढ़ें...

दो दिलों की इजाजत है मोहब्बत...........दो दिलों के जज्बात है मोह्ब्बत............... आगे पढ़ें...

मै एक खमोश दीवार हूँ.......खमोश रहकर देखता हूँ बिखरते हुए लोगो को..........कल मुझ पे भी रंग कर दिया गया.......मुझे भी बदलने की कोशिश हुई.......पर मै तो खमोश हूँ.........एक दीवार हूँ......... आगे पढ़ें...

आओ पतझड़ में शाक से अलग हुए पत्तों के झुरमूट में कुछ वक्त गुजारे..........सुना है कभी इनकी सरसराहट को........लो आओ सुने........ये भी कुछ कहती है.......जैसे उन दिनों की यादें बया कर रही हो......जब ये भी मुस्कुराती थी......हवा के ठंडे झोके के साथ ये भी ... आगे पढ़ें...

मेरी हर रात तेरी खमोशी लिए यौहि बीत जाती है........ना कोई आहट होती है.....ना कोई आवाज...........बस आँखें खुली-खुली तेरे आने का इंतजार करती है.......ओर जब तु आती है तो ये आँखें बंद हों जाती है......... आगे पढ़ें...

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