Welcome, Guest   [ Register | Sign In | Take a tour | Adult Filter: On ]

रात.......

में खामोश था हर रात की तरह इस रात भी.......
बस तेरी तनहायी बातें करती है.....
गुनगुनाती है....महकाती है.....
कभी आँखों में आकें बिखर जाती है....
कभी बाहों में भर लेती है.....
तेरी ये तनहायी इस खामोश रात मे......

अस्वीकरण