कुछ वक्त यौहि बीता तेरी यादों मे........
अब ये सोचता हु..........तु है भी तो सिर्फ़ यादों मे.........
कहा गए वो नमकीन पानी के झरने जो बह जाया करते थे गालों पर......
अब बारिश भी नही होती..........
मुझे अब भी याद है दोपहर की वो धूप जब बदन जल जाया करता था......
कई बार वही खड़ा तेरे इंतज़ार में अब भी......जहाँ से तू हवा के झोके जैसे गुजर जाया करती थी.......
बस अब याद है उन दिनों की....
धुंद्ली है पर है......
अब भी वक्त यौहि बीतता है तेरी यादों मे......
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