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सफर.............

तु मेरे साथ है...हर सफर की तरह इस बार भी..........
बस में बैठा हु.....खिड़की के पास.......

घने कोहरे को चीरते हुए बिना रुके बिना थके मेरा ये सफर........
दुर-दुर तक ओस की बुंदो से नम हुए खेतों को पीछे छोड़ता जा रहा हु......
दुर कुछ घर धुंद मै दिखायी पड़ते है.......

कभी कभी इस धुंद में तेरा चेहरा भी दिखायी पड़ता है.......
इस सफर में तेरा साथ भी मह्सूस सा पड़ता है....

कुछ यादे है जो सामने से आती दिखायी देती है.....
कुछ यादे पीछे छोड़ता जा रहा हु....

मै एक तलाश में हु......
एक सफर में हूँ इस बार भी........

प्रतिक्रियाएँ

Re: सफर.............
अच्‍छी अभिव्‍यक्ति है, भावनाएँ तो नहीं कहूँगी क्‍योंकि वो आपका ज्‍़याति मामला है। :)
अस्वीकरण