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एक रात............

मेरी हर रात तेरी खमोशी लिए यौहि बीत जाती है........

ना कोई आहट होती है.....ना कोई आवाज...........

बस आँखें खुली-खुली तेरे आने का इंतजार करती है.......

ओर जब तु आती है तो ये आँखें बंद हों जाती है.........

प्रतिक्रियाएँ

Re: एक रात............
बोहोत खूब साहब
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