मै एक बात लिखता हूँ..........जो सिर्फ मै ही कह्ता हूँ............
या शायद मुझे ही कहनी थी.........
आज मै उससे मोहब्बत करता हूँ.......पहले भी करता था.......कल भी करूँगा..........
पर आज वो मेरे साथ नही......पर मेरे पास है....सिर्फ मेरे लिये......
अब मुझे उसकी तलाश नही ,उसका इंतजार है......की कब वो मेरे साथ होगी.........
अब मै उसके ना होने के एहसास के साथ जीना चाहता हूँ......
या शायद मैने जीना शुरु कर दिया है........
उसकी यादो को सहेज रहा हूँ........
इन्ही यादो को नये नये नाम दे रहा हूँ.........
ओर जब मेरा ये इंतजार भी खत्म हो जायेगा उसके इंतजार मै तो फिर उसकी तलाश मै निकलुंगा.......
ओर तब एक बात लिखुंगा..........

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