Welcome, Guest   [ Register | Sign In | Take a tour | Adult Filter: On ]

मै प्रेम हूँ .......2

मै प्रेम हूँ.........
कवियों की कल्पनाओं से परे....,असमान की उचाई आगे.....
समुंद्र की गहराई से अधिक...........
मै प्रेम हूँ..........
नदियों का कल कल बह्ता पानी..., हवा से सरसराती पेड़ों की पतिया......
मै प्रेम हूँ.......
घने अंधेरे में रोशनी की झलक्...., तेज उजाले मै बढ़ता अंधकार.....
मै प्रेम हूँ........
घने कोहरे में ओस की बूँदें...,ओर सुर्ख धूप से छटा हुआ कोहरा........
मै प्रेम हूँ.........
मेरा होना तय है.....क्युकि मै ही आरंभ ओर मै ही अंत हूँ.........
क्युकि मै प्रेम हूँ.............................मै प्रेम हूँ

अस्वीकरण