मै प्रेम हूँ , सच में मै हार चुका था अपने आप से , पर अभी तक हारा नही था............
मै सोचता हूँ आज में कहीं नही हूँ , कुछ नही हूँ , पर हर जगह मै ही हूँ , सब कुछ मै ही हूँ............
क्योकी मै प्रेम हूँ , कोई मुझे लव कह्ता है ,कोई प्यार ,कोई मोहब्बत ,पर मै तो प्रेम हूँ...........
बहुत बार मै बदनाम हुआ पर मेरा नाम हुआ................
मुझे गजलो ने पनाह दी., शायरी ने मुझे निखारा., संगीत में मै समाया.......
लोग मुझे भूलते जा रहे है.,और मेरी ही तलाश मै निकले पड़े है..........
क्योकी मै प्रेम हूँ...........
मुझे किसी से कोई शिकवा नही.,ना कोई शिकायत..........
क्योकी मै प्रेम हूँ.............. बस इसके अलावा कुछ नही.......... मै बस प्रेम हूँ........
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