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एक पल्.........

कही पहुँचना का मन करता है..,जहाँ है तु खड़ी मेरे इंतजार में,मेरी तलाश में,या खुद को पाने के लिये.....
मुझे तो मुश्किल ही लगता है,अब ओर एक पल तेरे बग़ैर जीना ....पर क्य करूँ जीता हूँ ........

मै दुनिया के लिये अब तुझे पाना नही चाहता, पर अपने लिये पा लिया है तुझे......
अब ओर कोई ख्वाहिश नही रह गयी.......तुझको शायद मेरे लिये ही बनाया गया है.....

कभी सोचता हु, यूँ तु मेरी जिंदगी मै शामिल ना होती तो क्या होता........
तेरे बग़ैर ना अब कोई राह नजर आती है.....ना किसी मंज़िल तक पहुचने का आभास होता है...

कभी तो तेरे प्यार की नज़र उठेगी मेरी तरफ्........
मै तुझे भुल जाता ......मगर ये हो ना सका मुझसे.......
तेरे पास तु अमानत है मेरी...ओर इस अमानत को कभी ना कभी लौटाना होगा तुझे .....
मेरे लिये...............अपने लिये.........

प्रतिक्रियाएँ

Re: एक पल्.........
superb....mindblowing...fantastic...मुमताज......इसको पढ़ रहा हुन तो लग रहा है , अप्ना लिखा ही पढ़ रहा हूँ, वहि लिखने की शैली, वही thoughts...really बोहोत अच्छा लिखते हों यार...अल्फाज़ कम पड रहे हैं लिखने के लिये... :)
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