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कभी-कभी

मै कभी गुजरा था किसी राह पर तो जोड़ दिया था मैने उस सफर को तुझसे......
अपने सबसे मधुर संगीत के स्वर से, जो था कभी कभी मेरे दिल में खयाल आता है.......

वो मै रुक जाया करता था, गाड़ी रोककर जब मेरे मन मै गुंजते थे ये संगीत के स्वर.....
ऐसा होता था ,जैसे शब्द बह रहे हो हवा के संग ,ओर तेरे एहसास को मेरे ओर करीब ला रहे हो......

पर खो दिया था मैने उस संगीत के स्वर को, कई साल हो गये कही नही मिले,या शायद मैने तलाश ही नही किये.......

पर आज सात साल बाद मिले है, मुझे वो संगीत के स्वर.,आज लगा तु वापस आ गयी लौटकर,वो ही सब मह्सूस होने लगा जो आज से सात साल पहले होता था, अब मेरे हर सफर मै तु साथ होती है,बस तु ही होती है.....
ओर बस अब मै चलता जाता हु ,हर सफर में इन्ही संगीत क स्वरों के संग्...........तेरे संग ....तेरे संग

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