कभी जब तुझे दर्द होता था...
मै मांग लेता था अपने आप से तेरे दर्द का कुछ हिस्सा...
पता नही जब भी माँगता था मिल ही जाता था.....
शायद अच्छा ही लगता था मुझे ये सब्........
या ये मेरे ही खयाल का कोई एहसास था.......
या दबी हुई मेरी कोई कशिश थी........
या शायद मेरा हक्.......पता नही मुझे........शायद किसी को पता हो....
लोड हो रहा है...