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तेरी आँखें

रात भर तलाश्ता रहा मै आँखों में नींद को..उस नींद को, जो मुझे तुझसे दूर ले जाती थी..

कोशिश कि मैने पलकें झुकाने की ,पर तेरा चेहरा बार्-बार आके मुझे ले जाता था नींद से दूर्.....

वहाँ ,जहाँ तेरा ख्वाब बनने लगता.....वो ख्वाब जिसमें मै शामिल होता था......

मैं सोया भी नही था कई दिनो से और एक बार मुझे तेरे खयाल के संग जो नींद आयी थी उस नींद से जागा भी नही
था अब तक्.........

तेरा चेहरा भी अंधेरे की तरह ही है , रोशनी पड़ते ही बिखर् ने लगता है......जैसे आंखे बंद करते ही तेरा अक्स आ जाता है मेरे ख्वाबों में....... और आंखे खोलते ही बिखर जाता है तेरा चेहरा......वोही चेहरा जो मेरी आँखों मै समाया है................
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