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24 अप्रैल, 2008


ब्लॉग्स (2)
कभी जब तुझे दर्द होता था...मै मांग लेता था अपने आप से तेरे दर्द का कुछ हिस्सा...पता नही जब भी माँगता था मिल ही जाता था..... शायद अच्छा ही लगता था मुझे ये सब्........ या ये मेरे ही खयाल का कोई एहसास था.......या दबी हुई मेरी कोई कशिश थी........या शायद ... आगे पढ़ें...

रात भर तलाश्ता रहा मै आँखों में नींद को..उस नींद को, जो मुझे तुझसे दूर ले जाती थी.. कोशिश कि मैने पलकें झुकाने की ,पर तेरा चेहरा बार्-बार आके मुझे ले जाता था नींद से दूर्.....वहाँ ,जहाँ तेरा ख्वाब बनने लगता.....वो ख्वाब जिसमें मै शामिल होता था......मैं ... आगे पढ़ें...