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12 अप्रैल, 2008


ब्लॉग्स (2)
आज भी मेरे लिखे हुए शब्दों कि कड़ी में शामिल हो तुम्....और तुम्हारे वजूद को बरकरार रख पाया हु मै.....शायद इन्ही शब्दों कि कड़ी से आज तक तुम्हारी वास्तिविक्ता को बचाये रखा है मैने....वक्त कटता रहा धीमे-धीमे कदमो से बिना आहट के,और तु नये-नये आवरण मै ... आगे पढ़ें...

शायद फिर एक रात होने वाली है.....आज ख्वाबों मै जागना है मुझे,,शायद तेरे आने कि उम्मीद है.....दिनभर के तेरे खयाल ने तेरे आने के बारे में महसूस कराया था मुझे.....वही मिलुंगा तुझे जहाँ कल हम मिलते मिलते रह गये थे........सुबह कि ठंडी हवा ने मुझे जगा दिया था ... आगे पढ़ें...