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9 अप्रैल, 2008


ब्लॉग्स (1)
वहीं भीड़ भरा सफर ....वही कस्मकस जिंदगी कीं....फिर लौट आया मै शहर एक बार्.......वहीं गलिया, वहीं रास्ते..दिनभर जिन के पास वक्त नहीं...रात को वहीं सांसे लेते नजर आते है....... हा फिर लौट आया मै शहर एक बार्....खुद कीं तलाश मै.. नयी उम्मीद के संग.......इस ... आगे पढ़ें...