दौडते रहे रास्ते
बिना रुका बिना थके
जाने किस वास्ते
रात का अंतिम पहर
जब सुबह होने में थोडा वक्त बाकी होता है
तब देखा तुझे ठहरते हुए
हवा के ठंढे झोंके से यूँ तेरा टकराना
एक अजीब सी साय साय की आवाज
मानो तेरे दर्द की दास्तान बया कर रहा हो
दिन भर तुझ पर रेंगती रही जिंदगी
बेहिसाब तुझे कुचलती रही जिंदगी
तेरा दर्द देख
खुद का दर्द भूल सा गया था........

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